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IGIMS आई बैंक में 2 आंखें जमा: 82 साल की आंखों से दो नेत्रहीनों की दुनिया होगी रोशन, 398 को रौशनी के लिए अभी नेत्रदान का इंतजार

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पटना3 घंटे पहले

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नेत्रदान का सर्टिफिकेट दिखाते डॉक्टर। - Dainik Bhaskar

नेत्रदान का सर्टिफिकेट दिखाते डॉक्टर।

82 साल के श्यामा प्रसाद की आंखों से अब दो नेत्रहीनों की दुनिया रोशन होगी। शनिवार की रात मौत की सूचना पर IGIMS आई बैंक ने कार्निया निकाल लिया है। अब इसके ट्रांसप्लांट की तैयारी चल रही है। श्यामा प्रसाद की आंख मिलने के बाद भी अभी 398 लोगों को नेत्रदान का इंतजार है। अगर श्यामा प्रसाद के परिजनों की तरह हर इंसान जागरूक हो जाए तो यह लंबा इंतजार भी एक सप्ताह में खत्म हो जाएगा और नेत्रहीनों की दुनिया रोशन हो जाएगी।

न चीरा लगा न बहा खून, हो गया नेत्रदान

IGIMS आई बैंक के कोआर्डिनेटर अमित कुमार सोनी का कहना है कि श्यामा प्रसाद ने पहले से नेत्रदान का कोई प्लान नहीं किया था। शनिवार की रात 10 बजे मौत के बाद आई बैंक को सूचना मिली इसके बाद टीम उनके घर पहुंच गई। श्यामा प्रसाद की आंखों में न तो कोई चीरा लगाया गया और न ही एक बूंद खून बहा। बस एक्सपर्ट की टीम ने बस पलक उठाई और कॉर्निया को निकाल लिया। इसके बाद उसकी जगह एक आर्टिफिशियल कॉर्निया लगाकर पलक को बंद कर दिया गया। मौत के बाद और नेत्रदान के बाद कहीं से कोई फर्क नहीं दिख रहा है।

मां वैष्णो देवी सेवा समिति ने की बड़ी पहल

मां वैष्णो देवी सेवा समिति के फाउंडर मुकेश हिसारिया ने बताया कि सदस्य काफी एक्टिव रहते हैं और इस कारण से एक माह में 10 लोगों का नेत्रदान कराया गया है। मां वैष्णो देवी सेवा समिति के सदस्य मनीष बनेटिया की भूमिका नेत्रदान कराने में काफी अहम रही है। मनीष का कहना है कि दधीचि देहदान समिति इसके लिए मुहिम चला रही है, इस मुहिम के तहत नेत्रदान कराया गया है।

आप भी ला सकते हैं अंधेरे जीवन में उजाला

नेत्र रोग विशेषज्ञों का कहना है कि नेत्रदान से मरने वाले पर कोई असर नहीं पड़ता है। देखने में भी कोई अंतर नहीं होता है। ऐसे में कोई भी इंसान नेत्रदान कर नेत्रहीन लोगों के जीवन में उजाला ला सकते हैं। इसमें न तो उम्र की कोई बाध्यता है और न ही और कोई बाधा है। बस कुछ बीमारियां हैं जिसमें नेत्र नहीं लिया जाता है बाकी कोई समस्या नहीं है। 82 साल के श्यामा प्रसाद राय के परिजनों की तरह हर घर के लोगों को जागरूक होना होगा जिससे आंख खोने वालों को रोशनी मिल जाए। नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरी करने वाली IGIMS Eye Bank की टीम में शामिल डॉ. अंजुला और चंदन का कहना है कि डेंगू मलेरिया, HIV, हेपेटाइटिस, कैंसर के साथ वायरल बीमारियों में नेत्र नहीं लिया जाता है। अगर लिया भी जाता है तो काफी जांच के बाद इसे ब्लड बैंक में ट्रांसप्लांट के लिए रखा जाता है। मोतियाबिंद, शुगर ब्लड प्रेशर वाले मरीज भी नेत्रदान कर सकते हैं।

नेत्रदान के फैसले से परिजनों का आभार जताया

पटना के 82 वर्षीय श्यामा प्रसाद राय की मौत के बाद परिजनों के नेत्रदान वाले फैसले पर लोगों ने आभार जताया है। मुकेश हिसारिया का कहना है कि श्यामा प्रसाद राय की आंखे उनके जाने के बाद दुनिया देखेंगी यह बड़ी बात है। दुःख की घड़ी में भी नेत्रदान करने से परिवार ने गर्व महसूस करने वाला काम किया है। दधीचि देहदान समिति ने पत्नी मनोरमा रॉय, पुत्र राकेश, पुरुषोत्तम और कुमार उत्तम सहित पूरे परिवार का आभार जताया है।

अब आई बैंक में 14 दिन की तैयारी

नेत्र लेने के बाद आई बैंक में ट्रांसप्लांट की तैयारी चल रही है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस व्यक्ति की आंख ली जाती है उसका थोड़ा सा ब्लड भी जांच के लिए लिया जाता है। लैब में खून के साथ आंखों की भी पूरी बारीकी से जांच कराई जाती है। इसके बाद आई टिशू की क्वालिटी जांची जाती है। इसके लिए स्पेलर माइक्रो मशीन का उपयोग किया जाता है। सेल काउंट होने के बाद क्वालिटी का परिणाम अच्छा आने पर इसे बैंक में भेजा जाता है। अगर क्वालिटी ठीक होती है तो तीन से चार लोगों की आंखों में रोशनी आ जाती है, वैसे कम से कम दो लोगों को दुनिया देखने का मौका मिल जाता है। कॉर्निया मोबाइल के स्क्रीन की तरह होता है, इसे निकालने के बाद इसका इस्तेमाल किया जाता है। जांच के बाद ट्रांसप्लांट के लिए आंख को 14 दिन तक रखा जा सकता है। IGIMS आई बैंक के ट्रांसप्लांट कोआर्डिनेटर अमित का कहना है कि यहां 6 साल में 565 कलेक्शन हुए हैं जिससे 500 से अधिक लोगों को रोशनी दी गई है।

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