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10 करोड़ का सैनिटाइजर-मास्क डंप: अप्रैल-मई 2020 में कॉल कर पूछते थे लोग, अब भरा है गोदाम, नुकसान पर भी बेचने को तैयार

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पटना24 मिनट पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

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पटना के अंधेरे गोदाम में पड़े हैं मास्क-सैनिटाइजर, करीब 10 करोड़ का माल फंसा। - फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

पटना के अंधेरे गोदाम में पड़े हैं मास्क-सैनिटाइजर, करीब 10 करोड़ का माल फंसा। – फाइल फोटो

कोरोना की बरसी पर पिछले साल अप्रैल-मई का महीना याद कीजिए। सैनिटाइजर की ब्लैक मार्केटिंग हो रही थी। मिलता नहीं था। मिला तो प्रिंट से ज्यादा रेट पर। मास्क का रेट तो हर दिन बढ़ नहीं, उछल रहा था। और, आज वही मास्क-सैनिटाइजर अंधेरे गोदाम में पड़े हैं। कोरोना काल में बिहार की दवा मंडी ने करीब 10 करोड़ का सैनिटाइजर-मास्क बेचा और बाजार के जानकारों ने भास्कर को ऐसे गोदाम दिखाए जहां यही अब अंधेरे में ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। करीब 10 करोड़ का माल फंसा हुआ है इसी हाल में।

सैनिटाइजर के लिए आता था फोन

GM रोड में दवा के थोक कारोबारी मनोज एक साल पहले अप्रैल और मई का समय याद करते हुए बताते हैं कि एक सैनिटाइजर के लिए फोन आता था। मार्केट में सैनिटाइजर और मास्क की कमी थी। जिसके पास था वह मुनाफे के चक्कर में दबाए बैठा था। हालात को देखते हुए थोक मंडी में हर दिन बड़ी खेप आती थी। अंदाजा था कि सैनिटाइजर और मास्क का बाजार आसमान छुएगा, लेकिन बाजार को परखने में चूक हुई। दो तीन माह तक तो सैनिटाइजर-मास्क के लिए जुगाड़ लगाना पड़ता था लेकिन तीन माह बाद जब बाजार ठंडा पड़ा तो गोदाम में माल खराब हो रहा है। मनोज का कहना है कि गोदाम में सैनिटाइजर और मास्क रखे-रखे खराब हो रहा है। इस कारण से दवा और अन्य सामान गोदाम में रखने के लिए परेशानी हो रही है।

सैनिटाइजर और मास्क से भरा है गोदाम

बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के तरुण ने बताया कि इस समय प्रदेश में हर बड़े दवा कारोबारी के लिए सैनिटाइजर और मास्क का स्टाक बड़ी चुनौती है। मार्केट में जिस तरह से अप्रैल-मई में सैनिटाइजर और मास्क की मांग आई थी, इससे लग रहा था कि बाजार काफी ग्रोथ करेगा। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण मंडी भी ठंडी पड़ी थी। ऐसे में दवा का हर बड़ा कारोबारी सैनिटाइजर और मास्क का स्टाक करने में लग गया। अब यही स्टाक चुनौती बन गया है। सैनिटाइजर की डिमांड पहले केवल हॉस्पिटल में ही थी लेकिन कोरोना काल में जिस तरह हर ओर से मांग आई तो बाजार में छोटी-बड़ी हर शीशी गायब हो गई। बाजार का अनुमान लगाते हुए कारोबारियों ने बड़ी खरीदारी कर ली थी जो अब तक डंप है।

60 प्रतिशत सैनिटाइजर-मास्क डंप

बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के संतोष कुमार की मानें तो बिहार में लगभग 10 करोड़ का सैनिटाइजर और मास्क का कारोबार हुआ, लेकिन 60 प्रतिशत माल डंप पड़ा है। इसमें व्यापारियों का लगभग 10 करोड़ का माल फंसा हुआ है। सैनिटाइजर और मास्क डंप होने के पीछे बड़ा कारण यही है कि अचानक से मार्केट बूम किया और थोड़े ही समय में बैठ गया। अप्रैल-मई और जून में हर व्यक्ति पर 100 ML की शीशी का एवरेज था। ऐसे में आबादी के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो इसका बड़ा बाजार नजर आया लेकिन बाजार में जब सैनिटाइजर और मास्क आम हो गया तो बाजार ही बैठ गया। व्यापारियों को इस घाटे से उबरने में तीन साल तक लग जाएगा। GM रोड के दवा कारोबारी सुनील कुमार का कहना है कि अब तो खरीद से कम दाम पर भी कोई मास्क और सैनिटाइजर लेने को तैयार नहीं है। हॉस्पिटल में भी सप्लाई नहीं हो रही है क्योंकि वहां कंपनी से ही माल मंगाते हैं। गोदाम में सैनिटाइजर और मास्क खराब हो रहा है। इसके लिए गोदाम में अलग से व्यवस्था बनानी पड़ रही है। व्यापारियों का कहना है कि उम्मीद है कि कोरोना का ग्राफ बढ़ा तो सैनिटाइजर और मास्क की बिक्री बढ़ जाएगी।

100 ML का दाम 55 रुपए, अब 15 में देने को तैयार

गोविंद मित्रा रोड के सैनिटाइजर और मास्क के थोक कारोबारी ज्योति का कहना है कि वह गोदाम से परेशान हैं। जितना माल कोरोना काल में मंगाया था, 60 प्रतिशत डंप हो गया है। अब तो औने-पौने दाम में भी बेचने को तैयार हैं लेकिन कोई लेने वाला नहीं है। ज्योति का कहना है कि 100 ML की जो शीशी 50 रुपए में बिकती थी उसे अब 15 रुपए में बेचने को तैयार हैं लेकिन कोई ग्राहक नहीं है। थोक व्यापारियों का कहना है कि किसी भी प्रदेश में वह माल भेज सकते हैं बस कोई ग्राहक मिल जाए जिससे पूरा गोदाम खाली हो जाए। थोक व्यापारी प्रमोद का कहना है कि बस पूंजी खाली हो जाए, नुकसान पर भी सैनिटाइजर-मास्क भेजने को तैयार हैं। व्यापारियों को एक बार फिर उम्मीद है कि शायद कोरोना की दूसरी लहर में डिमांड बढ़े तो मास्क और सैनिटाइजर का बाजार बढ़े।

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