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हे यमदेव! भागलपुर के लोगों को ‘मौत-मुक्त’ रखें: बरारी श्मशान घाट में लाश जलाने का खर्च 30 हजार बताकर यमराज को लिखी चिट्‌ठी- इतना पैसा नहीं, इसलिए बख्शिए

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भागलपुर7 घंटे पहलेलेखक: कृष्णा बल्लभ नारायण

भागलपुर के लोगों ने यमराज को लिखी यही चिट्‌ठी।

‘ हे प्रभु! हमलोग मरने के बाद अपने परिवार को कष्ट नहीं देना चाहते, इसलिए अभी हमारे बीच मौत का वारंट लेकर मत आइएगा। भागलपुर में दाह संस्कार के नाम पर लूट मची है। एक लाश के अंतिम संस्कार में 30,920 रुपए का खर्च आता है, ऊपर से डोम राजा की मनमानी अलग। श्मशान घाट पर पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं, ऐसे में अगर मर गए तो परिवार के लोग परेशान ही होंगे, इसलिए हमारी विनती स्वीकार करें, फिलहाल मौत के वारंट को टाल दें।’ यह है खत का मजमून, जो भागलपुर के लोगों ने प्रतीकात्मक रूप से यमराज को लिखा है। इसकी प्रतिलिपि धरती पर भागलपुर के DM, SP, नगर आयुक्त और SDO को भी प्रेषित की गई है।

आखिर क्यों आई यमराज को चिट्‌ठी लिखने की नौबत
भागलपुर के बरारी घाट पर अराजक स्थिति से त्रस्त लोगों को जब कोई उपाय नहीं सूझा तो यमराज को ही चिट्‌ठी लिख दी। परेशानी की वजह यह है कि अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्तियों द्वारा मृत परिवार के परिजनों से मनमाना शुल्क वसूला जाता है। नहीं देने पर परिजनों के साथ बदसलूकी की जाती है। परिजनों से उसकी आर्थिक स्थिति के अनुसार राशि निर्धारित कर दी जाती है। यह राशि 5100 से लेकर 51 हजार तक हो सकती है। घास काटने और पंचकाठी के समय भी डोम राजा द्वारा काफी मोलभाव और बहस के बाद मुखाग्नि दी जाती है।

सरकार देती है 3 हजार, खर्च हो जाता है 30,920
कबीर अंत्येष्टि अनुदान योजना के तहत किसी परिवार के सदस्य की मृत्यु पर बिहार सरकार द्वारा मृतक की अंत्येष्टि के लिए 3 हजार रुपए की सहायता दी जाती है, जबकि घाट की व्यवस्था देख रहे लोग एक आम आदमी से इसका दस गुना ज्यादा पैसा खर्च करवा देते हैं। कर्ज लेकर अंतिम संस्कार कराने की नौबत आ जाती है।

और भी हैं कई परेशानियां

  • घाट पर जलती चिताओं को हवा से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं
  • शवदाह गृह में बेलचा, बाल्टी और चदरे की एक भी सीट उपलब्ध नहीं
  • घाट पर लगी हाईमास्ट लाइट खराब
  • पीने के लिए पानी की समुचित व्यवस्था नहीं
  • जलमीनार एक साल से खराब है
  • शवदाह गृह से सटे एक चापाकल भी है, जो महीनों से जर्जर है

अप्रशिक्षित लोगों के जिम्मे है विद्युत शवगृह

स्थानीय कमल जायसवाल ने बताया कि नगर निगम ने विद्युत शवदाह गृह के संचालन का जिम्मा 4 वैसे लोगों को सौंपा है, जिन्हें न तो तकनीकी ज्ञान है और न ही कोई प्रशिक्षण ही प्राप्त है। स्वीपर के रूप में भी 4 लड़कों को रखा गया है, जिनके पास कोई उचित कागजात नहीं है। आश्चर्य है कि करोड़ों रुपए की लागत से बने शवदाह गृह के रख-रखाव का निरीक्षण नगर निगम ने कभी भी तकनीशियन से नहीं कराई है। शवदाह गृह में 8 कर्मी 16 अगस्त 2020 से ही काम कर रहे हैं, लेकिन नगर निगम के द्वारा इनका पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। नगर निगम के द्वारा इन्हें कोई रजिस्टर या उपस्थिति पंजी नहीं मिली है। यही वजह है कि उनकी उपस्थिति पंजी को कोई वरीय पदाधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित भी नहीं किया गया है।

यमराज को पत्र लिखने वालों में ये शामिल

  • कमल जायसवाल
  • आनंद कुमार सिन्हा
  • विनय कुमार सिन्हा
  • अभय कुमार घोष
  • जयप्रकाश जायसवाल
  • कन्हैया लाल
  • राजीव कुमार आर्य

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