झारखंड

स्मृति शेष: तरुण दा गरीब खिलाड़ियों के लिए भगवान से कम न थे, आज सुबह 8 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा

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रांची8 मिनट पहले

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  • जैसा अंतरराष्ट्रीय रेफरी और पूर्व गोलकीपर ओपी ठाकुर ने बताया

तरुण दा गरीब खिलाड़ियों के लिए भगवान से कम नहीं थे। जिन खिलाड़ियों के घर में खाने को नहीं था, वहां खाना का भी इंतजाम कराते थे। एक पिता की तरह फुटबॉलरों की देखभाल करते थे। फुटबाल के लिए अपने घर में भी कम समय ही दे पाते थे। गांव-देहात के भटके हुए तरुण दा ने कई युवाओं को फुटबॉल से जोड़कर उनका करियर संवारा। उनसे ट्रेनिंग लेकर कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर का सफर तय किया। तरुण दा ने 1976 में एचईसी ज्वाइन की थी। हर शाम 5 बजे ऑफिस से निकलने के बाद वे सीधे एचईसी नेहरू स्टेडियम पहुंचते थे।

खेलने के दाैरान ही तरुण दा ने नए खिलाड़ियों की खोज शुरू की। इसके बाद एचईसी स्टेडियम में 10-12 खिलाड़ियों के साथ ट्रेनिंग शुरू की। धीरे-धीरे खिलाड़ियों का यहां जमावड़ा लगने लगा। फिर धुर्वा फुटबॉल एकेडमी का गठन किया। बहुत कम समय में यह एकेडमी रांची में चर्चित हो गई। एकेडमी में गरीब बच्चे ज्यादा थे। इनके पास न बूट था आैर न ही खेलने का समान। लेकिन कोच तरुण दा अपने पैसे से बच्चों को सामान देकर प्रैक्टिस करवाते थे। खेल के बाद अपने खर्चे से खिलाड़ियों को नाश्ता भी कराते थे। अब तरुण दा बिना किसी को तकलीफ दिए हम सबको छोड़कर चल दिए। अब एेसा अनमोल रत्न कहां से लाएंगे।

राज्य के फुटबॉलरों में शोक

तरुण के निधन की खबर सुनकर शहर के फुटबॉलर तरुण के घर इकट्‌ठा हो गए। किसी को यह यकीन ही नहीं हो रहा था की तरुण घोष अब इस दुनिया में नहीं रहे। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार को एचईसी नेहरू स्टेडियम में सुबह 7.30 बजे दर्शन के लिए रखा जाएगा। यहां खिलाड़ी, खेल संघ व अन्य लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे। 8 बजे अंतिम यात्रा स्टेडियम से निकलकर सिठियो मुक्तिधाम जाएगी।

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