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सिंगापुर में भारतीय प्रोफेशनल्स और कामगारों पर अघोषित नाकेबंदी: 8 हजार भारतीयों की एंट्री रोकी, डिपेंडेंट पास वालों पर भी संकट

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2 घंटे पहले

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बीते साल लॉकडाउन से पहले भारत या दूसरे देश गए आठ हजार से ज्यादा वर्क वीजाधारक भारतीय एक साल से सिंगापुर लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके आवेदन बार-बार रद्द किए जा रहे हैं। फाइल फोटो - Dainik Bhaskar

बीते साल लॉकडाउन से पहले भारत या दूसरे देश गए आठ हजार से ज्यादा वर्क वीजाधारक भारतीय एक साल से सिंगापुर लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके आवेदन बार-बार रद्द किए जा रहे हैं। फाइल फोटो

भारतीय प्रोफेशनल्स और कामगारों के लिए सिंगापुर अघोषित नाकेबंदी कर रहा है। बीते साल लॉकडाउन से पहले भारत या दूसरे देश गए आठ हजार से ज्यादा वर्क वीजाधारक भारतीय एक साल से सिंगापुर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। सिंगापुर का मैनपॉवर विभाग कोविड-19 की सख्त गाइडलाइन का हवाला देकर इनके आवेदन रद्द कर रहा है। सिंगापुर के बाहर फंसे इन लोगों का वर्क परमिट खत्म होने की कगार पर है।

1 मई से सिंगापुर में डिपेंडेंट पास (डीपी) कोटे पर नौकरी कर रहे 11 हजार लोग नौकरी गंवा सकते हैं। इनमें सात हजार भारतीय हैं। मैनपावर विभाग ने आदेश दिया है कि डिपेंडेंट पास पर नौकरी करने वाले हर शख्स को 1 मई तक वर्क परमिट लेना होगा। परमिट तभी मिल सकता है, जब कंपनी के पास विदेशी वर्कर्स का कोटा बचा हो। आदेश के पीछे सिंगापुर सरकार की मंशा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के ज्यादा मौके मुहैया कराना है।

सिंगापुर इमीग्रेशन व चेकप्वाइंट्स अथॉरिटी के मुताबिक जो फॉरेन वर्क पास के तहत काम कर रहे हैं, उन्हें सिंगापुर आने के लिए मैनपावर मंत्रालय की मंजूरी लेनी जरूरी है। भारतीय उच्चायोग के प्रवक्ता ने बताया, इस मुद्दे पर उच्चायुक्त पेरियासामी कुमारन ने सिंगापुर के मंत्रियों के साथ कई मीटिंग की हैं।

कोई शादी तो कोई पिता के इलाज के लिए आया, अब नौकरी पर संकट बेस्टिन बेनिन (परिवर्तित नाम) शादी के लिए पिछले साल 20 मार्च को भारत आए थे। वे मैनपावर विभाग में 12 बार आवेदन दे चुके हैं, पर मंजूरी नहीं मिली। आईटी एक्सपर्ट वी. रेड्डी पिता की सर्जरी कराने हैदराबाद गए थे। वे 22 बार आवेदन दे चुके हैं। भारत में नौकरी नहीं मिल रही। मई में वर्क परमिट भी खत्म हो जाएगा।

भारतीयों को इसलिए निशाना बनाया जा रहा
कोरोनाकाल में बेरोजगारी के कारण सिंगापुर के लोग विदेशी श्रमिकों, विशेष तौर पर भारतीयों को निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग 2005 में सिंगापुर और भारत के बीच मुक्त व्यापार संधि सीईसीए के खिलाफ भड़ास निकाल रहे हैं।
बीते 9 महीने में दो बार सिंगापुर के व्यापार और उद्योग मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं जिससे भारतीय नागरिक स्थायी निवासी और नागरिक बन सकें। इसके बावजूद सिंगापुर के सोशल मीडिया में भी भारतीय नागरिकों के खिलाफ गुस्सा है।

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