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सरकार के बयान से राहत की उम्मीद: पेट्रोल 75 रुपए और डीजल 68 रुपए में मिल सकता है, बस GST के दायरे में आ जाएं पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स

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नई दिल्ली23 मिनट पहले

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पेट्रोल-डीजल के दाम 100 रुपए प्रति लीटर के पार निकल गए हैं। ऐसे में अब इसे गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (GST) के दायरे में लाने की मांग होने लगी है। इसी बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार जीएसटी परिषद की अगली बैठक में पेट्रोल-डीजल पर चर्चा के लिए तैयार हैं। अगर फ्यूल को GST के तहत लाया जाता है तो देश में पेट्रोल की कीमत घटकर 75 रुपए और डीजल 68 रुपए प्रति लीटर पर आ सकती है।

पेट्रोल 30 रुपए और डीजल 20 रुपए तक सस्ता हो सकता है
हाल ही में जारी हुई SBI की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भी अगर GST लगाया जाए तो सीधे-सीधे 15 से 30 रुपए प्रति लीटर की राहत पेट्रोल पर मिल जाएगी और 10 से 20 रुपए तक की राहत डीजल पर। और तो और, कुछ राज्यों को इसका लाभ ही होगा। केंद्र सरकार की आय पर भी कोई बहुत बड़ा असर नहीं पड़ने वाला।

GST लागू होने के बाद कैसे तय होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत
SBI की रिपोर्ट में ये बताया गया है कि GST लागू होने के बाद क्रूड ऑइल की कीमतों के हिसाब से पेट्रोल और डीजल की कीमत कितनी रहेंगी। इसके अनुसार अगर क्रूड ऑइल 60 डॉलर प्रति बैरल है तो पेट्रोल 75 रुपए और डीजल 68 रुपए प्रति लीटर पर बिकेगा। फिलहाल पेट्रोल 63 डॉलर प्रति बैरल बिक रहा है।

एक साल में 150% महंगा हुआ क्रूड ऑइल
मार्च 2020 में क्रूड ऑइल 25 डॉलर प्रति बैरल था वहीं अगर अभी की बात करें तो अभी ये 63 डॉलर प्रति बैरल पर है। यानी एक साल में ये 150% से भी ज्यादा महंगा हो गया है। पिछले साल कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण क्रूड के दामों में गिरावट आई है।

अभी कैसे तय हो रही हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?दिल्ली और महाराष्ट्र ने की है मांग
दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग की है। महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का कहना है कि अगर ऐसा किया जाता है तो राज्य सरकारों के साथ केंद्र को भी फायदा होगा। ऐसे में सरकार अब पेट्रोल डीजल को GST के दायरे में लाने को लेकर दवाब में है। इसके अलावा पेट्रोल के दाम 100 रुपए के ऊपर जाने से लोगों में गुस्सा है और इसके अलावा अप्रैल और मई में 5 राज्यों में विधान सभा चुनाव भी है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की बात चुनावी स्टंट भी हो सकती है।

मौजूदा कर व्यवस्था में हर राज्य अपने हिसाब से पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाता है। केंद्र भी अपनी ड्यूटी और सेस अलग से वसूल करता है। पेट्रोल-डीजल का बेस प्राइज अभी करीब 32 रुपए है। इस पर केंद्र सरकार 33 रुपए एक्साइज ड्यूटी ले रही है। इसके बाद राज्य सरकारें अपने हिसाब से वैट और सेस वसूलती हैं। इससे इनकी कीमत बेस प्राइज से 3 गुना तक बढ़ गई हैं।

अनुराग ठाकुर ने GST को लेकर दिया था जवाब
राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा था कि पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने के लिए GST परिषद की सिफारिश जरूरी है। अब तक परिषद ने ऐसी कोई अनुशंसा नहीं की है। किसी भी चीज पर GST लगाने या हटाने या उनकी दरों में बदलाव करने के लिए GST परिषद में फैसला लिया जाता है। इसमें सभी राज्यों के वित्त मंत्री शामिल होते हैं। देश के वित्त मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं।

पिछले महीने पेट्रोलियम प्रोडक्ट को जीएसटी के दायरे में लाने पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ‘ये GST काउंसिल का विषय है। पेट्रोलियम इंडस्ट्री की तरफ से हम पहले दिन से इसके लिए अनुरोध कर रहे हैं। धीरे-धीरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट को GST की ओर ले जाना पड़ेगा।

किसी वस्तु को GST के दायरे में कैसे लाते हैं?
ये निर्णय अब GST काउंसिल कर सकती है, जिसमें राज्यों को प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इन दिनों भले कई नेता पेट्रोल डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग कर रहे हों, लेकिन वो ज़्यादा से ज़्यादा इस मुद्दे को काउंसिल की बैठक तक ले जा सकते हैं। इसके बाद GST काउंसिल में ही इसका फैसला होगा।

GST लागू होने से केन्द्र और राज्य सरकार के खजाने पर पड़ेगा असर
अगर पेट्रोल-डीजल पर GST लागू होता है तो इस पर से केन्द्र द्वारा लगाई जाने वाली एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला वैट हट जाएगा। इसके बाद 28% GST लगाया जाएगा। इसमें से 14% केन्द्र सरकार और बाकि का 14% राज्य सरकार के खजाने में जाएगा। अभी केन्द्र सरकार पेट्रोल पर 32.90 और डीजल पर 31.80 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूलता है। लेकिन GST के बाद ये पेट्रोल पर 5.21 रुपए और डीजल पर 5.28 रुपए रह जाएगा। इससे केन्द्र सरकार को पेट्रोल-डीजल से होने वाली कमाई 500% से भी कम हो जाएगी।

वहीं अगर राज्य सरकार की बात करें तो कई राज्य सरकारें पेट्रोल पर 30% से ज्यादा का वैट वसूलते हैं। दिल्ली में पेट्रोल पर 30% और डीजल पर 16.73% वैट वसूला जाता है। ये पेट्रोल पर 21.04 और 11.94 रुपए है। लेकिन GST के बाद ये पेट्रोल पर 5.21 रुपए और डीजल पर 5.28 रुपए रह जाएगा। इससे राज्य सरकार को पेट्रोल-डीजल से होने वाली कमाई 200% से भी कम हो जाएगी। साल 2020-21 के पहले 10 महीने में ही सरकार ने पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगाकर 2.94 लाख करोड़ रुपए हो चुका है।

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