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सरकारी बैंक इस मामले में रहे आगे: कस्टमर्स को RBI के रेट कट का पूरा फायदा सिर्फ सरकारी बैंकों ने दिया है, प्राइवेट बैंकों ने तो आधे रेट कट से भी हाथ खड़े कर दिए

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43 मिनट पहले

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  • रिजर्व बैंक ने कोविड के दौरान रेपो रेट 115 बेसिस प्वाइंट घटाया, सरकारी बैंकों ने फ्रेश लोन के रेट में 114 बेसिस प्वाइंट की कमी की
  • निजी बैंकों ने नए लोन का औसत लोन रेट सिर्फ 38 बेसिस प्वाइंट घटाया, विदेशी बैंकों ने 63 बेसिस प्वाइंट का रेट कट किया

कोविड फैलना शुरू होने के बाद रिजर्व बैंक ने जब-जब जितने के रेट कट किए, तब-तब सरकारी बैंकों ने भी नए लोन के रेट में कमोबेश उतने की कटौती की। रिजर्व बैंक रेपो रेट में अब तक 115 बेसिस प्वाइंट कमी कर चुका है। उसके मुकाबले सरकारी बैंक फ्रेश लोन के रेट में 114 बेसिस प्वाइंट की कमी हुई है। लेकिन प्राइवेट बैंकों ने अपने नए लोन की दरों में आधे की भी कटौती नहीं की है। 100 बेसिस प्वाइंट 1 पर्सेंटेज प्वाइंट के बराबर होता है।

जब RBI ने नकदी को वाजिब लेवल पर लाने की मंशा जताई तो SBI भी आगे आया

जब जनवरी में रिजर्व बैंक ने बाजार में नकदी को वाजिब लेवल पर लाने की मंशा जताई तो SBI ने उसके लिए भी अपनी तरफ से कोशिश की। उसने अपने होम लोन की दरों को 1 अप्रैल 2021 से बढ़ाकर 6.95% कर दिया और 31 मार्च 2021 तक ऑफर किए जा रहे 6.7% दर वाली स्कीम को बंद हो जाने दिया।

लॉकडाउन के बाद से सरकारी बैंकों का औसत लोन रेट 114 बेसिस प्वाइंट घटा

रिजर्व बैंक के हालिया डेटा के मुताबिक, कोविड के चलते हुए लॉकडाउन के बाद से सरकारी बैंकों का औसत लोन रेट 114 बेसिस प्वाइंट घटा है। मार्च 2020 में उनका औसत लोन रेट 8.64% रहा था जो फरवरी 2021 में 7.5% पर आ गया था। लेकिन प्राइवेट बैंकों ने नए कस्टमर्स को आधे रेट कट का भी लाभ नहीं दिया।

प्राइवेट बैंकों ने नए लोन का औसत लोन रेट सिर्फ 38 बेसिस प्वाइंट घटाया जबकि विदेशी बैंकों ने 63 बेसिस प्वाइंट का रेट कट किया। लेकिन प्राइवेट बैंकों के डिपॉजिट रेट में कमी सरकारी बैंकों के मुकाबले ज्यादा रही है। प्राइवेट बैंकों ने डिपॉजिट रेट 100 बेसिस प्वाइंट जबकि सरकारी बैंकों ने 82 बेसिस प्वाइंट रेट घटाया है।

RBI ने पॉलिसी रेट 115 बेसिस प्वाइंट घटाकर 4% कर दिया है

RBI के जिस पॉलिसी रेट के हिसाब से बैंक अपने लोन की दरें एडजस्ट करते हैं उसको 115 बेसिस प्वाइंट घटाकर 4% कर दिया है। कोविड के चलते पिटी इकोनॉमी को पटरी पर लाने और मांग बढ़ाने के लिए RBI लगातार रेट घटाता रहा है। लॉकडाउन के चलते लगातार दो तिमाही में GDP का साइज घटने से इकोनॉमी मंदी में फंस गई थी।

प्राइवेट बैंकों ने रिटेल लोन जमकर बांटे हैं, इसमें अब तक प्राइवेट बैंकों का दबदबा रहा है

लोन और डिपॉजिट में सरकारी बैंकों का हिस्सा तीन चौथाई से ज्यादा है। कोविड के दौरान उन्होंने प्राइवेट और फॉरेन बैंकों के मुकाबले ज्यादा लोन बांटे हैं। उसमें MSME के सपोर्ट के लिए शुरू की गई इमर्जेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) सहित कई सरकारी योजनाओं और आत्मनिर्भर भारत के तहत जारी दूसरे अभियानों का बड़ा हाथ रहा है। उन्होंने रिटेल लोन भी जमकर बांटे हैं जिसमें अब तक प्राइवेट और फॉरेन बैंकों का दबदबा रहा है।

SBI के होम लोन की दर 6.95% है, स्पेशल स्कीम की दर से 25 बेसिस प्वाइंट ज्यादा

देश के सबसे बड़े बैंक SBI की वेबसाइट के मुताबिक उसके होम लोन की दर 6.95% है जो 31 मार्च 2021 तक चली स्पेशल स्कीम के तहत ऑफर की जा रही 6.7% की दर से 25 बेसिस प्वाइंट ज्यादा है। कई राज्यों की सरकारों ने रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मकानों की खरीदारी पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी में कटौती की थी। बाजार के जानकारों के मुताबिक, इसमें राज्यों को सपोर्ट देने के लिए बैंकों ने ब्याज दरें कम की थी। राज्यों की तरफ से स्टांप ड्यूटी में छूट खत्म होने पर बैंक भी होम लोन की दरों को पहले के रेट पर ले आए।

रेपो रेट में तीन बार में की है 115 बेसिस प्वाइंट की कटौती

रिजर्व बैंक ने पिछले तीन बार में रेपो रेट में 115 बेसिस प्वाइंट की कटौती की है। उसने 22 मई 2020 को अंतिम बार रेपो रेट घटाकर 4.00% किया था। उससे पहले 27 मार्च 2020 को RBI की तरफ से रेपो रेट 4.40% पर लाया गया था। 4 अक्टूबर 2019 को रेपो रेट 5.40% से घटाकर 5.15% किया गया था।

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