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लॉकडाउन ट्रैवलर्स: सबकुछ बेच दुनिया घूमने निकला दंपती सालभर फंसा रहा, अब बोट से 14 हजार किमी समुद्री यात्रा कर ऑस्ट्रेलिया लौटने का सफर किया शुरू

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3 दिन पहलेलेखक: मेलबर्न से अमित चौधरी

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जेक-टमारा ने शुक्रवार को पनामा से यात्रा शुरू की। चार महीने के सफर में इनका सामना समुद्री तूफान और शार्क जैसी जानलेवा मछलियों से होगा। - Dainik Bhaskar

जेक-टमारा ने शुक्रवार को पनामा से यात्रा शुरू की। चार महीने के सफर में इनका सामना समुद्री तूफान और शार्क जैसी जानलेवा मछलियों से होगा।

  • ऑस्ट्रेलियाई कपल ने लॉकडाउन के बावजूद एक साल में की 4 महाद्वीपों और 8 देशों की यात्रा

कहानी जेक शेपर्ड और उनकी पत्नी टमारा इल्लिक की है। यह ऑस्ट्रेलियाई कपल सबकुछ बेचकर दुनिया की सैर पर निकला था, लेकिन कोरोना ने इनकी राह मुश्किल कर दी। लॉकडाउन और तमाम बंदिशों से दो-चार होते हुए इस कपल ने एक साल में 4 महाद्वीपों और 8 देशों की यात्रा पूरी कर ली।

जब इनके पास पैसे नहीं बचे तो इन्होंने एक छोटी बोट के सहारे पनामा से ऑस्ट्रेलिया की समुद्री यात्रा शुरू की है। सबकुछ ठीक रहा तो शेपर्ड कपल 14 हजार किमी की दूरी तय कर चार महीने में ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाएगा। अपनी कहानी बता रहे हैं शेफर्ड कपल….

लॉकडाउन ने हमारी यात्रा को बेहद रोमांचक और साहसिक बना दिया

हम ब्रिस्बेन में 9 से 5 की नौकरी कर रहे थे। इस रुटीन से तंग हो चुके थे। लिहाजा हमने दुनिया घूमने की योजना बनाई। पैसे नहीं थे, इसलिए घर-बार बेच दिया। तय किया जिस देश में जाएंगे, वहीं छोटा-मोटा काम करके खर्च निकाल लेंगे। दो मार्च को हम थाइलैंड पहुंचे और 14 मार्च को टूर गाइड की नौकरी मिल गई। तीन दिन बीते थे कि लॉकडाउन लग गया और नौकरी चली गई। ऑस्ट्रेलियाई सीमा भी सील हो चुकी थी। हम यहां 8 हफ्ते फंसे रहे।

लॉकडाउन में छूट मिली तो दक्षिणी थाइलैंड से उत्तरी थाइलैंड के कई शहरों से होते हुए सैकड़ों किमी की दूरी तय की। कोरोना की चलते पूरी दुनिया हिल चुकी थी। इसलिए हमने लोगों को अपना अनुभव बताने के लिए यूट्यूब पर लॉकडाउन ट्रेवलर्स चैनल शुरू किया। 26 सितंबर को थाईलैंड से पेरिस पहुंचे। यहां पहली बार कोरोना का असर देखा। विमान में इक्का-दुक्का लोग थे। सामान्य तौर पर एफिल टावर पर टिकट लेकर ऊपर चढ़ने में 4 घंटे लगते हैं, लेकिन हमें 20 मिनट लगे।

11 नवंबर तक फ्रांस में कोविड से 41 हजार मौतें हो चुकी थीं। हमारे पैसे खत्म हो रहे थे। हम प्लेन की जगह बस से बेल्जियम होते हुए एम्स्टर्डम पहुंचे। यहां कुछ दिन बिताने के बाद मेक्सिको पहुंचे। यहां छोटी-मोटी नौकरियां करके गुजारा किया। दो महीने घूमने के बाद जनवरी में पनामा पहुंचे। लॉकडाउन के दौरान पैदा हुई समस्या ने हमारे सफर को रोमांचक बना दिया, लेकिन अब हम दोनों का धैर्य टूटने लगा है।

इसलिए घर वापस जाना चाहते हैं। तीन बार ऑस्ट्रेलिया का टिकट लिया, लेकिन हर बार फ्लाइट रद्द हो गई। इससे हजारों डॉलर फंस गए। लिहाजा हमने छोटी बोट किराये पर ली है। इससे हमने 14,500 किमी की यात्रा शुरू कर दी है। उम्मीद है चार महीने का सफर तय कर हम अपनी सरजमीं पर पहुंच जाएंगे।

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