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लापरवाही: मेकॉन की श्यामली कॉलाेनी में कई माइक्रो कंटेनमेंट जोन, सड़कों की बैरिकेडिंग की गई

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रांची21 घंटे पहले

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  • केंद्रीय गृह मंत्रालय के वर्क फ्रॉम होम के निर्देश पर मेकॉन प्रबंधन ने ध्यान नहीं दिया, नतीजा सामने

मेकॉन के 200 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हाे गए हैं। सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को होम आइसोलेशन में रखा गया है, इनमें से 7 को निमोनिया होने के कारण मेकॉन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। संक्रमण बढ़ने से कॉलाेनी में हड़कंप मच गया है। कॉलाेनी में कई बिल्डिंग को माइक्राे कंटेनमेंट जाेन घोषित कर सील कर दिया गया है। 15 दिन पहले मेकॉन के गिने-चुने अधिकारियाें- कर्मचारियाें को ही काेराेना पॉजिटिव की सूचना थी। संक्रमण की भनक लगते ही गृह मंत्रालय ने मेकॉन प्रबंधन को पत्र भेजकर वर्क फ्रॉम होम लागू करने काे कहा था, लेकिन प्रबंधन ने उस पत्र को नजरअंदाज कर दिया।

नतीजा, एक सप्ताह के दौरान कोरोना संक्रमिताें की संख्या तेजी से बढ़ गई। मेकॉन के डोरंडा स्थित मुख्यालय के पांचवें तल्ले पर गेल इंडिया का कार्यालय है और उसके अधिकतर अधिकारी-कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। पिछले गुरुवार को गेल इंडिया ऑफिस में मात्र 15- 20 अधिकारी कर्मचारी ही उपस्थित थे। वहां मौजूद कर्मचारी ने पूछने पर बताया कि अधिकतर लोग कोरोना पॉजिटिव हाेने के कारण घर पर हैं। इसके बावजूद मेकॉन प्रबंधन ने कोई एहतियाती कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं मेकॉन इंप्लाइज एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल नेकोरोना की भयावह स्थिति को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय के वर्क फ्रॉम होम के निर्देशवाले पत्र का जिक्र भी किया, लेकिन प्रबंधन ने उसे नकार दिया।

बिशॉप वेस्टकोट स्कूल में पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग के बाद 16 शिक्षक- कर्मचारी पॉजिटिव

बिशप वेस्टकॉट स्कूल के एकसाथ 16 शिक्षक और कर्मी कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग प्रबंधन ने सभी का टेस्ट कराया गया है। हुलहुंडू के एक स्कूल की चार छात्राओं के संक्रमित होने की सूचना है।उधर शुक्रवार को रिम्स में 50 डॉक्टर,कर्मी और भर्ती मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। शनिवार को भी बड़ी संख्या में रिम्स में संक्रमितों की पहचान हुई है।

परीक्षा में कोरोना रिपोर्ट की मांग पर जांच के लिए हुजूम

राजधानी में बीते 10 दिनों से कोरोना वायरस की दूसरी लहर इतनी तेज है कि रिकवरी रेट लगातार कम हो रहा है। लेकिन, यहां के सबसे प्रमुख सरकारी अस्पताल रिम्स व सदर हॉस्पिटल सुपर स्प्रेडर बन सकते हैं। यह अंदेशा इसलिए है कि दोनों अस्पतालों में काेराेना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रिम्स और सदर अस्पताल में शनिवार को कोरोना जांच के लिए काफी लोग पहुंचे, जो अच्छी बात है। लेकिन, किसी ने कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं किया। जांच के लिए आए लोग व स्टूडेंट्स कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। सैंपल कलेक्ट करने के लिए रिम्स व सदर अस्पताल में दो-दो काउंटर बनाए गए हैं। जांच कराने के लिए आपाधापी का माहौल नजर आया। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन की ओर से न तो लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ लाइन में खड़ा किया जा रहा था और न ही किसी पुलिसकर्मी को तैनात किया गया था। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यहां कोरोना जांच कराने आए लोगों के खुद संक्रमित होने का खतरा बढ़ गया है।

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