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यलगार परिषद केस: मुंबई की अदालत ने स्टेन स्वामी की जमानत याचिका खारिज, पांच महीने से मुंबई की तलोजा जेल में हैं बंद

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मुंबई7 घंटे पहले

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स्टेन स्वामी को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। - Dainik Bhaskar

स्टेन स्वामी को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है।

मुंबई की एक विशेष अदालत ने सोमवार को एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार ट्राइबल राइट एक्टिविस्ट स्टेन स्वामी की जमानत याचिका खारिज कर दी। रांची निवासी 83 वर्षीय स्वामी पिछले पांच महीनों से तलोजा सेंट्रल जेल में बंद है। NIA ने स्वामी को 7 अक्टूबर को रांची से गिरफ्तार किया था। अगले दिन उन्हें मुंबई लाया और उनके और सात अन्य लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया। वह तब से न्यायिक हिरासत में है। NIA के मुताबिक भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में फादर स्‍टेन स्‍वामी की भूमिका काफी अहम थी।

स्टेन स्वामी पर आरोप है कि वह प्रतिबंधित संगठन CPI (माओवादी) के सदस्य हैं। इसके फ्रंटल संगठन (PPSC ) के संयोजक हैं। सक्रिय रूप से इसकी गतिविधियों में शामिल रहते हैं। संगठन का काम बढ़ाने के लिए उन्होंने एक सहयोगी के माध्यम से पैसे हासिल किए। CPI (माओवादी) का प्रोपेगेंडा फैलाने, इसकी प्रचार सामग्री और साहित्य उनके कब्जे से मिला था।

क्या है पूरा मामला?

कोरेगांव-भीमा गांव में 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के लोगों का एक कार्यक्रम आयोजित हुआ था। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया था। एल्गार परिषद के सम्मेलन के दौरान इस इलाके में हिंसा भड़की थी। भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी। इस हिंसा में एक शख्स की जान चली गई और कई लोग जख्मी हो गए थे। इस हिंसा में माओवादी कनेक्शन भी सामने आया था। महाराष्ट्र पुलिस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसमें राव, स्वामी और कई अन्य कार्यकर्ता शामिल है।

कौन है स्टेन स्वामी?
स्टेन स्वामी को सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है। झारखंड में चल रहे जल, जंगल जमीन, विस्थापन जैसे आंदोलन को उन्होंने बौद्धिक समर्थन दिया। फादर स्टेन स्वामी 60 के दशक में तमिलनाडु के त्रिचि से झारखंड पादरी बनने आये थे। थियोलॉजी (धार्मिक शिक्षा) पूरी करने के बाद वह पुरोहित बने। लेकिन ईश्वर की सेवा करने के बजाय उन्होंने आदिवासियों और वंचितों के साथ रहना चुना।

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