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मूवी रिव्यू: अर्जुन-परिणीति की ‘संदीप और पिंकी फरार’ में क्‍लैरिटी कम कन्‍फ्यूजन ज्यादा, रोमांच और रफ्तार आधा

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14 मिनट पहलेलेखक: अमित कर्ण

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रेटिंग 3.5/5
स्टारकास्ट अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, पंकज त्रिपाठी, जयदीप अहलावत, रघुवीर यादव और नीना गुप्ता
डायरेक्टर दिबाकर बनर्जी
प्रोड्यूसर दिबाकर बनर्जी
म्यूजिक डायरेक्टर दिबाकर बनर्जी, अनु मलिक, नरेंद्र चंद्र, कमलेश हरीपुरी
जोनर डार्क कॉमेडी
अवधि 2 घंटे 5 मिनट

‘संदीप और पिंकी फरार’ क्राइम जॉनर की ऐसी फिल्‍म है, जिसमें क्‍लैरिटी कम, कन्‍फ्यूजन ज्यादा है। इसके मुख्‍य किरदार अपराध क्‍यों करते हैं? उसकी ठोस वजह आधे अधूरे तौर पर स्‍थापित हो सकी हैं। मसलन हीरोइन संदीप कौर या सैंडी वालिया (परिणी‍ति चोपड़ा) बिजनेस स्‍कूल में गोल्‍ड मेड‍लि‍स्‍ट है। वह फर्जी खाते खुलवाकर अपने प्रेमी बॉस परिचय अग्रवाल की मदद करती है। फिर प्रेमी ही उसके खिलाफ हो जाता है। हीरो पिंकी दाहिया (अर्जुन कपूर) हरियाणा पुलि‍स से है। सस्‍पेंड है। अपने हैंडलर त्‍यागी (जयदीप अहलावत) के लि‍ए क्राइम करके अपनी नौकरी वापस हासि‍ल कर सकता है। हीरोइन और हीरो दोनों टकराते हैं और दोनों का द्वंद्व शुरू हो जाता है।

अपराधों के प्रायश्‍च‍ित के लिए पहाड़ों में भागते हैं। जान भी बचानी है। वहां एक भोले कपल रघुबीर यादव और नीना गुप्‍ता के यहां ठहरते हुए पुलिस और हैंडलर से बचने की कोशिश करते हैं। सबके बीच बाहरी तौर पर चूहे-बिल्‍ली का खेल चलता रहता है। अंदरूनी तौर पर मुख्‍य किरदारों में अपराध बोध बसा हुआ है।

दिबाकर बनर्जी और राइटर वरुण ग्रोवर इन प्‍लॉट और सब प्‍लॉट के आगे नहीं बढ़ पाते। किरदारों की जद्दोजहद में फंस कर रह जाते हैं। हीरोइन अपर मिडिल क्‍लास से है। उसे भागने के चक्‍कर में रेलवे और बसों की सवारी करनी पड़ती है, जो उसके लि‍ए तकलीफदेह और नई है। प्रेग्‍नेंसी में भी उस पर रेप अटेंम्‍प्‍ट होता है। पूरी फिल्‍म में संदीप पर चांटें बरसते रहते हैं।

हीरो पिंकी दाहि‍या अपराध करने निकलता, लेकिन पहुंच कहीं और जाता है। यह सब बड़ी धीमी गति से होता है। दिबाकर की फिल्‍मों में बेरहम हालात पहले भी दिखते रहें हैं। आज की तारीख के क्राइम ड्रामा में गति और रोमांच दोनों की दरकार रहती है। यहां वह सब मिसिंग है। क्‍लाइमैक्‍स की गति वैसी हो गई है, जैसी ‘इंडियाज मोस्‍ट वांटेड’ की हो गई थी। बेहद प्रीडि‍क्‍टेबल।

फिल्म को परफॉर्मेंस का मजबूत सहारा

यकीनन अर्जुन कपूर, परिणीति चोपड़ा, नीना गुप्‍ता, जयदीप अहलावत और रघुबीर यादव ने अपने परफॉर्मेंस से फिल्‍म को मजबूत सहारा दिया है। अनिल मेहता की सिनेमैटोग्राफी से किरदारों की ऊहापोह और माहौल की टेंशन जाहिर होती है। अर्जुन कपूर ने पिंकी दाहिया के किरदार को जिया है। परिणीति यहां ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन’ से ज्यादा बेहतर लगी हैं। बतौर त्‍यागी जयदीप अहलावत का काम सीमित था, पर उसे वो धारदार बना गए हैं।

विलेन हीरोइन का प्रेमी बॉस है। फिल्‍म में भी उसे बार-बार प्रेमी बॉस ही कहा जाता है। वह जिस स्‍कैम का हिस्‍सा है, उस पर वरुण ग्रोवर ने पीएम मोदी की एक परियोजना का तंज कसा है, जि‍सके जरि‍ए कुछ बैंकों ने फर्जी अकाउंट खोले थे। यह राजनीति‍क तंज पूरी फिल्‍म में कई मौकों पर आता है।

यह पोटेंशि‍यल क्राइम ड्रामा फिल्‍म है। इसमें सधी हुई शुरूआत और असरदार तेवर हैं। कमी बस और ज्‍यादा ट्व‍िस्‍ट और टर्न की रह गई। दिबाकर बनर्जी को इन पहलुओं पर गौर फरमाना चाहिए। उन जैसे समर्थ फिल्‍मकार इंडस्‍ट्री के लिए ट्रीट हैं।

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