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बिहार के गौरव-8: PIL दायर कर उठाते हैं जनता की आवाज, हाईकोर्ट ने विसिल ब्लोअर कहा तो रिलायंस ग्रुप ने रीयल हीरो

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पटना2 घंटे पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

22 मार्च को बिहार दिवस है। बिहार के निर्माताओं को उनके योगदान के लिए नमन करते हुए भास्कर ऐसी 10 शख्सियतों से रू-ब-रू करा रहा है, जो नई पहचान बने हैं। मिसाल बन रहे हैं। आज के हिसाब से नई पीढ़ी को जिनसे प्रेरणा मिल रही है। 8वें दिन, आज जानें कि एक बिहारी कैसे बन गया ‘रीयल हीरो’-

उन्होंने अकेले लड़ने की ठानी। दबंग लोगों से लड़ाई थी। भिड़ंत इतनी आसान नहीं थी। कहीं शातिर लोग थे। कहीं लड़ाई सरकार से थी। PMCH, NMCH, गोशाला, पटना यूनिवर्सिटी और वेटनरी कॉलेज जमीन मामले में दबंगों ने धमकियां दीं, लेकिन धमकी के घंटे भर बाद ही वे हर दिन की तरह कंधे पर फाइलों वाला कपड़े का थैला टांग हाईकोर्ट की तरफ निकलते रहे। यही वर्षों से उनकी दिनचर्या है। यह सच की ताकत है कि वे रुके नहीं। धमकियों की अनंत कहानियां उनके साथ-साथ चलती रहीं। 64 साल के विकास चंद्र उर्फ गुड्डु बाबा अपने मन-मिजाज के हैं। वे वकील नहीं हैं, पर अपने PIL (PUBLIC INTREST LETIGATION) के लिए कोर्ट में हिंदी में बहस खुद से करते हैं। वे अब तक कोर्ट में छह दर्जन जनहित याचिका दायर कर चुके हैं। पटना हाईकोर्ट ने उन्हें विसिल ब्लोअर यानि सच को उजागर करने वाला कहा और संरक्षण दिया। वे आगे बढ़ते चले गए। रिलायंस ग्रुप ने देश के चुनिंदा लोगों के साथ उन्हें भी रीयल हीरो एवार्ड दिया।

दबंगों को मिली लूट की छूट पर हल्ला बोला
विकास चंद्र उर्फ गुड्डु बाबा की पहचान सोशल एक्टिविस्ट के रूप में है। अपना पूरा जीवन जनता को समर्पित कर दिया और इनके PIL ने कई लोगों की जिंदगियां बदल दीं। इस PIL के लिए वे सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां जुटाते हैं। वे कहते हैं कि अब सूचना के अधिकार का भी मतलब खोता जा रहा है। सूचना देने में काफी आनाकानी करते हैं विभागों के सूचना अधिकारी। इन्होंने दो विषयों राजनीतिशास्त्र और लोक प्रशासन से MA किया, पर नौकरी की चाहत वैसी नहीं रही। कैसे पेट चलेगा, कैसे चलेगी परिवार की गृहस्थी, बुढ़ापे में क्या होगा, ये सारे सवाल उनके सामने भी थे, लेकिन उनके सामने बड़ा सवाल था जनता और उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा सही से इस्तेमाल हो। दबंगों को मिली लूट की छूट पर उन्होंने हल्ला बोला।

पहला PIL गंगा को बचाने और लावारिश लाशों के लिए किया
MA करने के बाद कुछ दिन प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया, लेकिन मन रमा नहीं। गंगा उन्हें खींचती रही। गंगा की गंदगी देख उसके सफाई अभियान में लग गए। उस समय PMCH में पोस्टमार्टम के लिए आई लावारिश लाशों को पोस्टमार्टम हाउस के पीछे की तरफ गंगा में डाल दिया जाता था। गुड्डु बाबा ने इसका विरोध किया। उन्होंने PMCH के पीछे से सैकड़ों फेंकी हुई लाशों को गंगा से बाहर निकाला। उन्होंने इस मामले को लेकर पहला PIL किया। 21 जुलाई 2000 को पटना हाईकोर्ट को इन्होंने बताया कि इन लावारिश लाशों से गंगा तो प्रदूषित हो ही रही है साथ ही वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का अभियान इन्होंने शुरू कर दिया। यह मामला पटना हाईकोर्ट में आठ वर्षों तक चला। गंगा सफाई अभियान से शुरू हुआ यह मामला PMCH के अंदरुनी सुधार से जुड़ गया। 16 मार्च 2000 को तत्कालीन जस्टिस शशांक कुमार सिंह और SK कटरयार ने फैसला दिया कि गंगा में लावारिश लाशों को नहीं फेंका जाए, यह सरकार की जवाबदेही है। यह तय किया गया कि PMCH में आई लावारिश लाशों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार के लिए रोगी कल्याण समिति एक हजार रुपए देगी। पटना हाईकोर्ट ने PMCH के ICU और अन्य मशीनों की मॉनिटरिंग की। इस जनहित याचिका ने स्वास्थ्य विभाग के कई प्रधान सचिवों जैसे अफजल अमानुल्लाह, SS वर्मा, दीपक कुमार और अमरजीत सिंहा को देखा। 2008 में इस पहले PIL का निष्पादन हुआ। इसी PIL में हाईकोर्ट ने डॉक्टरों की मनमानी पर रोक लगाने वाला आदेश दिया। कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की ड्यूटी का समय निर्धारित किया। अस्पताल में मरीजों को देने वाले नाश्ता और भोजन के लिए 2001 में सरकार 3 रुपए 55 पैसे खर्च करती थी, उसे गुड्डु बाबा के आग्रह पर कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने 25 रुपए प्रति मरीज किया। आगे 2007 में इसे बढ़ाकर 50 रुपए और फिर 2013 में 100 रुपए सरकार ने किया।

इन PIL ने बिहार के लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया

  • 2000 में उन्होंने PIL करके कोर्ट को बताया कि बिहार में बिना मान्यता के PMCH सहित छह मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई हो रही है। शिक्षकों की कमी के कारण मान्यता रद्द होने की स्थिति थी। कोर्ट के आदेश के बाद कई विभागों को मान्यता मिली और डॉक्टरों की बहाली भी की गई। 2010 में बिहार के छह मेडिकल कॉलेजों की लगभग 100 एकड़ जमीन पर भू-माफियाओं के कब्जे का मामला लेकर हाईकोर्ट गए और जमीन खाली कराई। उन्हें इस PIL को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा। अभी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहा है।
  • 2009 में बिहार की सरकारी गौशालाओं की हजारों एकड़ जमीन का मामला लेकर हाईकोर्ट गए और दबंगों से कई जगह जमीन खाली कराई गई। यह PIL भी उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक ले जाना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट इसकी मॉनिटरिंग कर रहा है। कोर्ट में हाजीपुर गौरक्षिणी गौशाला की दो एकड़ जमीम पर सरकार ने पहले तो कहा कि यहां गौशाला है ही नहीं, लेकिन जब गुड्डु बाबा ने इससे जुड़े कागजात कोर्ट में प्रस्तुत किए तो पता चला कि सच कुछ और है। दो एकड़ जमीन 2008 में लीज की गई और 2013 में सबलीज कर दी गई। अभी यह मामला हाईकोर्ट में चल ही रहा है।
  • 2016 में पटना के वेटनरी कॉलेज सहित राज्य के 38 जिलों में जानवरों के इलाज के लिए 24 घंटे 7 दिन सेवा उपलब्ध कराने का निर्देश कोर्ट ने दिया। साथ ही सरकार ने 903 पशु चिकित्सकों की बहाली करने का फैसला लिया। इसमें से 587 डॉक्टरों की बहाली हो चुकी है। वेटनरी कॉलेज पटना में पशुओं के लिए बेहतर सुविधा बहाल हुई।
  • 2017 में भभुआ कैमूर में वन विभाग की 352 एकड़ जमीन गुड्डु बाबा ने दबंगों के कब्जा से खाली कराई। इस पर असामाजिक तत्वों का कब्जा था। कोर्ट के आदेश से सरकार ने यहां कंटीले तार लगवाए और पौधरोपण करवाया।
  • 2015 में पटना विश्वविद्यालय की 3 एकड़ जमीन PIL करके खाली करवाई। NIT के पास गोलखपुर में यह जमीन है। यहां छात्रावास पर अवैध कब्जा था इसे भी कोर्ट के आदेश के बाद खाली कराया गया।
  • 2016 में बिहार के 38 जिलों के सिविल सर्जन के अधीनस्थ चल रहे सरकारी अस्पतालों की हजारों एकड़ जमीन पर से अतिक्रमण हटाने का आदेश पटना हाईकोर्ट ने दिया। यह PIL अभी चल ही रहा है।
  • 2016 में ही वेटनरी कॉलेज की 640 एकड़ जमीन के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा के विरुद्ध वे हाईकोर्ट गए। इसके क्वार्टरों पर भी लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था। कई में तो दबंगों ने इसे किराए पर वर्षों से कमाई का जरिया बना लिया था। इन सभी को कोर्ट के आदेश से खाली कराया गया। इसी PIL से पटना के कौटिल्या नगर का चर्चित मामला भी जुड़ा हुआ है। गुड्डू बाबा बताते हैं कि कौटिल्या नगर में 20 एकड़ जमीन पर जगन्नाथ मिश्रा की सरकार के समय सांसदों- विधायकों, पार्षदों ने कॉपरेटिव बनाकर हैसियत के अनुसार वेटनरी कॉलेज की जमीन आपस में बांट ली। यह सरकार के संरक्षण में हुआ जमीन का बहुचर्चित मामला है। पटना हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई चल रही है।
  • 2018 में बाबा ने पटना हाईकोर्ट को बताया कि पटना जिले के 97 स्कूलों में चहारदीवारी नहीं है। दबंग लोगों ने कई जगह जमीन पर कब्जा कर लिया है। हाईकोर्ट ने इसे खाली कराने का आदेश दिया है।
  • 2018 में दरभंगा में राणी रामेश्वरी आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय दरभंगा की 20 एकड़ जमीन पर कब्जा था। उसे हाईकोर्ट के आदेश से खाली कराया गया।
  • 2010 में जानवरों को गंगा में फेंकने का मामला लेकर वे हाईकोर्ट गए। मृत पशुओं को लोग गंगा में फेंक रहे थे। इस PIL के बाद कोर्ट ने मृत पशुओं का शवदाह गृह स्थापित करने का आदेश सरकार को दिया और पूर्वोत्तर भारत का पहला जानवरों के लिए विद्युद शवदाह गृह रामचक बैरिया, पटना में लगाया गया। कोर्ट ने सख्त आदेश दिया कि किसी भी हालत में गंगा में मृत जानवरों को नहीं फेंका जाए। इस मामले में गुड्डु बाबा ने सरकार के खिलाफ कोर्ट में अवमाननावाद भी दायर किया।
  • बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने करोड़ों की मशीन खरीदी पर उसे आज तक चलाया ही नहीं गया। इससे जुड़े PIL की सुनवाई पटना हाईकोर्ट 2018 से कर रहा है। इसमें वेंटिलेटर, TMT, डायलिसिस मशीन, इंडोस्कोपी मशीन, फेको मशीन आदि हैं।
  • 2018 में पुलिस रिफॉर्म के लिए कोर्ट गए। एक चौकी पर तीन-तीन पुलिस के जवानों को सोना पड़ता है। उनके रहने की सम्मानजनक व्यवस्था नहीं है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद निर्माण कार्य चल रहा है।
  • 2010 में PMCH में हुए 12 करोड़ के दवा घोटाले का मामले लेकर कोर्ट गए तो कोर्ट के आदेश पर विजिलेंस जांच हुई। इसमें 15 लोग चार्जशीटेड हैं। इसमें निगरानी ने गुड्डु बाबा को भी मुख्य गवाह बनाया हुआ है।
  • 2016 में इन्होंने कोर्ट में नकली दवा कारोबारियों के खिलाफ सरकारी अस्पतालों में दवा एक्सपायरी देने का मामला सामना लाया। इसमें भी FIR हुई है। नकली दवा कारोबारियों पर नकेल कसने के लिए हाईकोर्ट ने SIT जांच का आदेश दिया है।
  • 2002 में बिहार के नौ में से नौ विद्युत शवदाह गृह बंद थे तो आत्मदाह करने की घोषणा की। जब सरकार इससे भी नहीं जागी तो हाईकोर्ट में PIL किया। इसके बाद सभी विद्युत शवदाह गृह चालू किए गए।
  • अंत्योदय योजना के तहत अनाज की गुणवत्ता के सवाल पर 2018 में कोर्ट गए। सवाल उठाया कि लोगों को सड़ा हुआ अनाज क्यों मिल रहा है। जनवितरण प्रणाली से जुड़े माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई हुई। गुणवत्ता में सुधार भी किया गया। गाड़ियों में GPS सिस्टम लागू हुआ।

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