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नवादा से ग्राउंड रिपोर्ट-2: एक मां ने कहा – बेटे को पाउच पिलाया गया, एक पत्नी का आरोप – पुलिस ने बयान बदलवाया, एक बेटा बोला- पापा शराब पीकर आए थे

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नवादा41 मिनट पहलेलेखक: अमित जायसवाल

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सिसवां के मृतक गोपाल की पत्नी गुड़िया और उसके बच्चे (बाएं)। खरीदी बिगहा के मृतक दिनेश प्रसाद का बेटा करण। - Dainik Bhaskar

सिसवां के मृतक गोपाल की पत्नी गुड़िया और उसके बच्चे (बाएं)। खरीदी बिगहा के मृतक दिनेश प्रसाद का बेटा करण।

  • नवादा में होली के मौके पर जहरीली शराब पीने से अबतक 16 लोगों की हुई है मौत

पूर्ण शराबबंदी को लेकर बिहार सरकार भले ही अपनी पीठ वक्त-वक्त पर थपथपाती रही हो, मगर नवादा में हुए जहरीले शराब कांड ने राज्य सरकार के तमाम दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। भास्कर की टीम पटना से नवादा गई थी। ग्राउंड रिपोर्ट में जो असलियत सामने आई, वो बेहद चौंकाने वाली थी। भास्कर टीम गोंदापुर, सिसवां और खरीदी बिगहा पहुंची। जहरीली शराब से मरने वाले लोगों के परिवार से मिली। फिर लोगों ने जो असलियत बताई, जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। इन इलाकों में देसी शराब की सिर्फ सप्लाई ही नहीं होती, बल्कि नदी और सन्नाटे से भरे खेत वाले इलाकों में बेखौफ होकर शराब बनाई भी जाती है।

लुंगी-गंजी के साथ बांटी गई थी पाउच, पंचायत चुनाव से जुड़ा कनेक्शन

गोंदापुर में 20 साल के आकाश कुमार की मौत हुई। वह अपनी मां उषा देवी का लाडला बेटा था। भले ही मजदूरी करता था, मगर पूरा परिवार खुशी के साथ अपनी जिंदगी जी रहा था। जब भास्कर की टीम इस कांड में नवादा के सबसे सेंसेटिव इलाके गोंदापुर में आकाश के घर पहुंची तो उस वक्त भी उसकी मां बेटे को याद कर रोती-बिलखती हुई मिली। उनकी आखों के आंसू पूरी तरह से सूख गए थे, फिर भी लाडले को याद कर रो रही थी। पूछा कि बेटे की मौत कैसे हुई? उषा देवी ने साफ कहा कि शराब पीने से बेटा मर गया।

होली वाले दिन सुबह में आकाश उठा था। बगल में ही पंडित जी के बेटे के साथ गया था। वहीं पर अजित नाम के एक युवक ने शराब की पाउच दे दी। उसी में आकाश और पंडित जी के बेटे ने पी। इसके बाद आकाश की तबीयत बिगड़ी, उसे हॉस्पिटल ले जाया गया और फिर उसकी मौत हो गई।

आकाश को याद कर बिलखती उसकी मां उषा देवी।

आकाश को याद कर बिलखती उसकी मां उषा देवी।

रोते-रोते उषा देवी ने बताया कि जिस अजित ने उनके बेटे को शराब का पाउच दिया था, उसके छोटे चाचा पंचायत चुनाव लड़ रहे हैं। मतलब साफ है कि गोंदापुर इलाके में जहरीली शराब का कनेक्शन पंचायत चुनाव से जुड़ा हुआ है। कुछ लोगों ने बताया कि शराब की पाउच के साथ ही एक-एक लुंगी और गंजी भी बांटी गई थी।

मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद एक घंटे में मौत

सिसवां गांव, नवादा टाउन थाना का ही हिस्सा है। शहर के मुख्य बाजार से इसकी अच्छी दूरी है। जहरीली शराब पीने से इस गांव में 28 साल के युवक गोपाल कुमार की मौत हुई थी। गोपाल कुंती नगर के मॉर्डन स्कूल में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। 29 मार्च को दोपहर तीन बजे के करीब उसे स्कूल से छुट्‌टी मिली थी। घर आने से पहले रास्ते में ही उसने देसी शराब की पाउच खरीदी और पी ली। नशे में होने के कारण घर पहुंचने पर पत्नी गुड़िया देवी ने टोका नहीं, उसे सोने दिया। 30 मार्च की सुबह उसकी तबीयत बिगड़ी। पेट में जलन और उल्टी शुरू हो गई। शरीर काला पड़ने लगा था। भागते हुए परिवार वाले गोपाल को सबसे पहले नवादा के सदर अस्पताल ले गए। 10-15 मिनट में ही वहां से उसे पावापुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जब वहां पहुंचे तो इलाज शुरू होने के महज एक घंटे के अंदर ही उसकी मौत हो गई।

पुलिस वाले ने बयान बदलवाया, जबरन सिग्नेचर कराया

बात यहीं खत्म नहीं होती है। जब जहरीली शराब का मामला नवादा से लेकर राजधानी तक पहुंचता है तो हड़कंप मचता है। गोपाल के परिवार और पत्नी का आरोप है कि 31 मार्च के दिन में सदर SDM, BDO और टाउन थाना की टीम पहुंची। असलियत को छिपाने के लिए इन लोगों ने खूब प्रेशर बनाया। जब इनसे बात नहीं बनी तो रात के 12:30 बजे टाउन थाना के ASI अंजनी कुमार को भेजा। घर पर पहुंचकर उसने खूब डराया और धमकाया। सीधे कहा कि जहरीली शराब की बात मत बोलो, नहीं तो पूरा परिवार फंस जाएगा। उसने परिवार के एक सदस्य से बयान बदलवाने की नीयत से जबरन सिग्नेचर भी कराया। बावजूद इसके परिवार अपनी सच्चाई के साथ अब भी खड़ा है। गोपाल के दो बच्चे हैं, जिनके ऊपर से पिता का साया हमेशा के लिए हट गया।

‘होली के दिन शाम में पापा सोए तो अगले दिन उठे नहीं’

नवादा का खरीदी बिगहा गांव सिसवां जाने के रास्ते में ही है। 35 साल के दिनेश प्रसाद इसी गांव के रहने वाले थे। जिस वक्त भास्कर की टीम इनके घर पहुंची तो वहां हमें उनका बेटा मिला। पत्नी और परिवार के दूसरे सदस्य बाहर गए हुए थे। बेटे करण के अनुसार होली के दिन शाम में दिनेश ने देसी शराब पी थी। बाहर से पीकर जब वो घर आए तो कमरे में जाकर सो गए। किसी से कुछ बात किए ही नहीं। अगले दिन सुबह होने पर वो उठे ही नहीं। शक होने पर मां और हमलोगों ने उठाने की कोशिश की तो कोई हलचल नहीं मिली। तब जाकर घर के पास में ही रहने वाले एक कम्पाउंडर को बुलाया गया। उन्होंने ही चेक किया और पापा की सांस रुक जाने की बात बताई। इसके बाद एक दिन रात में पुलिस वाले आए थे और बुआ से किसी पेपर पर सिग्नेचर कराकर चले गए। उस पर क्या लिखा हुआ था? इस बारे में हम लोगों को कुछ पता नहीं है।

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