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नक्सलियों का मीडिया को मैसेज: वॉट्सऐप कॉल पर नक्सलियों ने कहा- बीजापुर मुठभेड़ के बाद लापता जवान हमारे कब्जे में, पर नुकसान नहीं पहुंचाएंगे

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बीजापुरएक घंटा पहले

राकेश्वर सिंह मनहास के परिवार ने उनकी दो फोटो जारी कर सरकार से विंग कमांडर अभिनंदन की तरह उन्हें नक्सलियों के कब्जे से छुड़ाने की अपील की है।

बीजापुर के तर्रेम में 3 अप्रैल को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में लापता जवान का पता चल गया है। नक्सलियों ने ही मीडिया को वॉट्सऐप कॉल पर जवान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जवान उनके पास है, पर उसे किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। वह सुरक्षित है। कोबरा बटालियन के इस जवान का नाम राकेश्वर सिंह मनहास है। वह जम्मू-कश्मीर का निवासी है। बीजापुर एसपी कमल लोचन ने इस जवान की लोकेशन नहीं मिलने की बात कही थी।

नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान 23 जवान शहीद हुए थे। इनमें से 20 के शव नहीं मिल पाए थे। एयरफोर्स की मदद से 20 जवानों के शव रिकवर किए गए थे। एक जवान लापता था।

पत्नी बोलीं- अभिनंदन की तरह मेरे पति को भी सुरक्षित लाए सरकार
कोबरा कमांडो राकेश्वर की पत्नी मीनू का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार नक्सलियों की जो भी डिमांड है, उसे पूरा करे और पति की रिहा कराए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह पाकिस्तान से अभिनंदन को छुड़ाया था, उसी तरह मेरे पति को भी नक्सलियों के कब्जे से छुड़ाकर लाएं। मीनू के मुताबिक, CRPF कंट्रोल रूम फोन करने पर भी सही जानकारी नहीं मिल रही है।

ऑपरेशन से लौटते वक्त हुआ हमला, 4 घंटे तक फायरिंग हुई
घायल ASI आनंद कुसाम ने बताया कि हमारे साथ 450 जवानों की पार्टी थी। जिस ऑपरेशन के लिए भेजा गया था, उसे खत्म कर लौट रहे थे। जब ऑपरेशन के लिए गए थे, तब कोई नक्सली हलचल नहीं थी। लौटे तो करीब 700 नक्सलियों ने घेरकर फायरिंग शुरू कर दी। सुबह 11 बजे मुठभेड़ शुरू हुई जो दोपहर 3 बजे तक चलती रही।

ग्राउंड जीरो पर पहुंचा भास्कर, गांव में हर ओर थीं जवानों की लाशें
नक्सली मुठभेड़ के अगले दिन 4 अप्रैल को भास्कर की टीम सुकमा के दोरनापाल से 60 किमी का मुश्किल सफर तय कर ग्राउंड जीरो पर पहुंची। यहां गांव में 60-70 नक्सली थे। उन्होंने पूछताछ शुरू कर दी और जब ये जाना कि मीडियावाले हैं तो नरम पड़े। नक्सलियों ने गांववालों की ओर इशारा कर कहा कि इनके साथ आगे जाओ। जब टीम आगे बढ़ी तो हर ओर जवानों के शव पड़े थे। एक भी जवान जिंदा नहीं था। नक्सलियों ने जवानों के जूते और हथियार सहित दूसरे सामान ले लिए थे।

DRG, STF, कोबरा और बस्तर बटालियन के जवान शहीद

DRG STF COBRA 210 बस्तर बटालियन
सब इंस्पेक्टर दीपक भारद्वाज (जांजगीर चांपा, CG) हेड कांस्टेबल श्रवण कश्यप (बस्तर, CG) इंस्पेक्टर दिलीप कुमार दास (बारपेटा, असम) कांस्टेबल समैया माड़वी
हेड कांस्टेबल रमेश कुमार जुर्री (कांकेर, CG) कांस्टेबल रामदास कोर्राम (कोंडागांव, CG) हेड कांस्टेबल राजकुमार यादव (फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश)
हेड कांस्टेबल नारायण सोढ़ी (बीजापुर, CG) कांस्टेबल जगतराम कंवर (राजनांदगांव, CG) सीटी राकेश्वर सिंह मनहास (कोथियन, जम्मू)*
कांस्टेबल रमेश कोरसा (बीजापुर, CG) कांस्टेबल सुखसिंह फरस (गरियाबंद, CG)

सीटी धर्मदेव कुमार (चंदौली, उत्तर प्रदेश)

कांस्टेबल सुभाष नायक (बीजापुर, CG) कांस्टेबल रमाशंकर पैकरा (सरगुजा, CG) सीटी शखामुरी मुरारी कृष्ण (गुंटूर, आंध्र प्रदेश)

सहायक कांस्टेबल किशोर एंड्रीक (बीजापुर, CG)​​​​​​​

कांस्टेबल शंकरनाथ (बीजापुर, CG)​​​​​​​ सीटी रघु जगदीश (विजयनगरम, आंध्र प्रदेश)
सहायक कांस्टेबल सनकुराम सोढ़ी (बीजापुर, CG)​​​​​​​ सीटी शंभू राय (नार्थ त्रिपुरा, त्रिपुरा)
सहायक कांस्टेबल भोसाराम करटामी (बीजापुर, CG)​​​​​​​ सीटी बबलू रंभा (गोवलपारा, असम)

* जवान राकेश्वर सिंह का नाम शहीदों की लिस्ट में है, लेकिन नक्सलियों के ऑडियो मैसेज में दावा किया गया है कि राकेश्वर उनके कब्जे में सुरक्षित है…

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