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टीकाकरण अभियान ने दी उम्मीद: CEOs को हालात 2022 तक सामान्य होने की उम्मीद नहीं, कुछ कंपनियों के कारोबार के तौर-तरीके हमेशा के लिए बदले

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एक घंटा पहले

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  • 90% ग्लोबल और 94% इंडियन CEO एंप्लॉयी को टीका लगते ही उसके बारे में बताने के लिए कहने को सोच रहे हैं
  • इंडिया में 76% CEO दफ्तर से काम शुरू कराने के लिए आधे से ज्यादा एंप्लॉयी का टीकाकरण होने का इंतजार करना चाहेंगे

दुनिया भर के बिजेनस हेड इस सोच विचार में डूबे हैं कि कोविड के चलते बने हालात में उनके कारोबारी तौर-तरीके कैसे होंगे। ग्लोबल लेवल पर लगभग आधे (45%) चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) को लगता है कि कारोबारी स्थितियां 2022 तक सामान्य नहीं हो पाएंगी।

इसी साल हालात बेहतर होने की उम्मीद कर रहे एक तिहाई टॉप एग्जिक्यूटिव

लगभग एक तिहाई यानी 31% CEO इसी साल में हालात बेहतर होने की उम्मीद कर रहे हैं। एक चौथाई (24%) CEO का कहना है कि कोविड ने उनकी कंपनी के कारोबार के तौर-तरीके हमेशा के लिए बदल दिए हैं। ये बातें फरवरी और मार्च में 500 ग्लोबल CEO पर KPMG की स्टडी से निकल कर सामने आई हैं।

एंप्लॉयी को टीका लगते ही बताने के लिए कहने को सोच रहे हैं CEO

KPMG की स्टडी में शामिल ज्यादातर ग्लोबल CEO एंप्लॉयी टीकाकरण को लेकर चिंतित नजर आए। वे सोच नहीं कर पा रहे कि उनके एंप्लॉयी कब दफ्तर लौट पाएंगे। 90% ग्लोबल और 94% इंडियन CEO सोच रहे हैं कि वे एंप्लॉयी को टीका लगते ही उसके बारे में बताने के लिए कहें। इससे उनको दफ्तरों में एंप्लॉयी को सुरक्षित रखने के उपाय ढूंढने में मदद मिल सकती है।

आधे से ज्यादा एंप्लॉयी का टीकाकरण होने का इंतजार करना चाहेंगे

इंडिया में 76% CEO का कहना है कि वे दफ्तर से काम शुरू कराने के लिए आधे से ज्यादा एंप्लॉयी का टीकाकरण होने का इंतजार करना चाहेंगे। हालांकि एक तिहाई (34%) ग्लोबल CEO टीके के सुरक्षित होने को लेकर फैल रही अफवाहों से फिक्रमंद हैं। उन्हें डर है कि इसके चलते कहीं एंप्लॉयी टीका लेने से परहेज न करना शुरू कर दें।

अहम बाजारों में बदले हालात के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं CEO

KPMG के ग्लोबल चेयरमैन और CEO बिल थॉमस कहते हैं, ‘CEO कोई भी कदम उठाने से पहले यह पक्का कर लेना चाहते हैं कि उनके स्टाफ को टीका लग जाए। टीकाकरण अभियान से उनमें उम्मीद की किरण जगी है और वे अहम बाजारों में बदले हालात के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि कई बाजारों में रिकवरी असमान रह सकती है जिससे उनके कामकाज, सप्लाई चेन और लोगों पर गहरा असर पड़ सकता है।’

कोविड के चलते कंपनियों के कामकाज के डिजिटाइजेशन में तेजी आई

उनके मुताबिक, ‘कुछ एग्जिक्यूटिव ने अपने यहां कामकाजी तौर-तरीकों में बदलाव के लिए ठोस कदम उठाए हैं। कंपनी की कायापलट करने वाले कुछ अहम प्रोजेक्ट में मजबूरी या जरूरत के हिसाब से तेजी लाई है।’ स्टडी के मुताबिक, इंडिया में 66% यानी दो तिहाई जबकि ग्लोबल लेवल पर 74% यानी तीन चौथाई CEO का मानना है कि कोविड के चलते उनके कामकाज के डिजिटाइजेशन और फ्यूचर ओरिएंटेड मॉडल बनाने के काम में तेजी आई है।

आधे से ज्यादा एंप्लॉयी का टीकाकरण होने के बाद बुलाए जाएंगे एंप्लॉयी

ग्लोबल लेवल पर 76% और इंडिया में 76% CEO कंपनियां कामकाज शुरू करने के लिए सरकार की तरफ से बढ़ावा दिए जाने को एंप्लॉयी को दफ्तर बुलाने का संकेत मान रहे हैं। हालांकि 61% ग्लोबल और 76% इंडियन एग्जिक्यूटिव आधे से ज्यादा एंप्लॉयी का टीकाकरण होने के बाद ही उन्हें दफ्तर बुलाने के बारे में सोच रहे हैं। दुनिया के 21% और भारत में 18% CEO एंप्लॉयी को दफ्तर बुलाने से पहले ऐसी व्यवस्था करना चाहते हैं, जिसमें क्लाइंट और विजिटर्स के लिए अपने टीकाकरण के बारे में बताना जरूरी होगा।

ऑफिस छोटा करने के बारे में सोच रहे 17% ग्लोबल और 22% इंडियन CEO

स्टडी में शामिल फिलहाल 17% ग्लोबल और 22% इंडियन सीईओ ऑफिस का साइज छोटा करने के बारे में सोच रहे हैं। पिछले साल अगस्त में 69% ग्लोबल और 48% इंडियन CEO अगले तीन साल में ऑफिस स्पेस घटाने के बारे में सोच रहे थे।

हाइब्रिड मॉडल पर विचार कर रहे 30% ग्लोबल और 32% इंडियन एग्जिक्यूटिव

दफ्तर में कामकाज के दिनों को लेकर भी CEO की सोच में बदलाव आया है। 10 में तीन यानी 30% ग्लोबल और 32% यानी एक तिहाई इंडियन CEO हाइब्रिड मॉडल अपनाने के बारे में सोच रहे हैं। इसमें ज्यादातर एंप्लॉयी को हर हफ्ते 2-3 दिन रिमोट वर्क करने की सहूलियत मिलेगी।

ऐसे में सिर्फ 21% ग्लोबल और 22% इंडियन कंपनियां खासतौर पर रिमोट वर्कर हायर करने के बारे में सोच रही हैं। पिछले साल ग्लोबल लेवल पर 73% और इंडिया में 77% कंपनियां रिमोट वर्क करने वालों को हायर करने के बारे में सोच रही थीं।

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