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केयर्न टैक्स मामला: अप्रैल मध्य तक ही भारत सरकार कर सकती है अपील, 10,247 करोड़ लौटाने हैं सरकार को

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मुंबई19 मिनट पहले

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  • केयर्न कई देशों में इस फैसले को लागू करने की प्रक्रिया कर रही है
  • वह विदेशों में भारत सरकार की संपत्तियां जब्त कर सकती है

सरकार के पास केयर्न मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल (इंटरनेशनल ऑर्बिट्रेशनल ट्रिब्यूनल) के फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए अप्रैल-मध्य तक का समय है। मध्यस्थता ट्रिब्यूनल ने सरकार को ब्रिटेन की केयर्न एनर्जी पीएलसी को 10,247 करोड़ रुपए और ब्याज तथा लागत आदि लौटाने को कहा है। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ भारत सरकार के पास चुनौती देने के लिए कुछ सीमित आधार ही हैं।

सरकार का टैक्स का दावा खारिज हो चुका है

हेग की स्थानीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल में तीन सदस्यीय पीठ ने केयर्न एनर्जी के खिलाफ सरकार के 10,247 करोड़ रुपए के टैक्स के दावे को खारिज कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने सरकार को कंपनी के बेचे गए शेयर, जब्त डिविडेंड तथा रोके गए टैक्स रिफंड को लौटाने को कहा था। यह 9आठ जनवरी को नीदरलैंड में रजिस्टर्ड हुआ था। भारत ने 19 जनवरी को इसके रजिस्ट्रेशन पर सहमति जताई। सूत्रों ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ इन दो तिथियों के 90 दिन के अंदर अपील की जा सकती है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि नीदरलैंड के कानून के अनुसार इस निर्णय को निरस्त किए जाने की संभावना काफी कम है।

वित्तमंत्री ने फैसले के खिलाफ चुनौती देने का संकेत दिया

इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसी महीने संकेत दिया था कि इस फैसले में सरकार के टैक्स लगाने के अधिकारों पर सवाल उठाया गया है, जिसके मद्देनजर सरकार इसके खिलाफ अपील करेगी। वित्त मंत्रालय का मानना है कि टैक्सेशन ब्रिटेन-भारत द्वपिक्षीय निवेश जैसी संधियों का विषय नहीं है। ऐसे में इस फैसले को चुनौती दी जानी चाहिए। केयर्न ने इसी आधार पर कर मांग को चुनौती दी है।

592 पेज में आया फैसला

582 पेजों वाले केयर्न अवार्ड में विस्तार से बताया गया है कि कंपनी किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं कर रही थी। जब इसने 2006-07 में लिस्टिंग से पहले इसने अपने भारत के कारोबार का पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) किया और यह भी बताया गया है कि कैसे सरकार ने टैक्स डिमांड बढ़ाने के लिए 2012 के रेट्रोस्पेक्टिव कानून का इस्तेमाल किया।

निर्णय का आधार टैक्स के अधिकार के लिए चुनौती नहीं था

ऑर्बिट्रेशन अवार्ड ने विशेष रूप से यह स्पष्ट कर दिया कि निर्णय का आधार साल 2021 का कानून या भारत के टैक्स के अधिकार के लिए चुनौती नहीं था। ट्रिब्यूनल ने सर्वसम्मति से फैसले में कहा था कि यह मुद्दा घरेलू टैक्स कानून का मामला नहीं है। बल्कि यह है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हैं या नहीं। हेग पैनल ने पाया कि भारतीय संसद द्वारा पारित 2021 का कानून एक नया टैक्स था।

9 देशों के कोर्ट में मामला

केयर्न ने भारत के खिलाफ इस अवार्ड को लागू करने के लिए 9 देशों के कोर्ट में मामला कर दिया है। इस अवार्ड को अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा और फ्रांस की कोर्ट द्वारा पहले ही मान्यता दी जा चुकी है और सिंगापुर, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और केमैन द्वीप समूह में भी यही प्रक्रिया चल रही है। सरकार द्वारा फर्म को भुगतान नहीं करने की स्थिति में अवार्ड का रजिस्ट्रेशन इसके एनफोर्समेंट की दिशा में पहला कदम है।

सूत्रों ने कहा कि एक बार कोर्ट एक ऑर्बिट्रेशन अवार्ड को मान्यता दे देती है, तो कंपनी फिर किसी भी भारतीय सरकार की संपत्ति जैसे बैंक खातों, सरकारी संस्थाओं, हवाई जहाज आदि को जब्त कर सकती है।

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