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ऑस्ट्रेलियाई सरकार की अनैतिकता का चेहरा: ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय परिवार को बच्चे की बीमारी की वजह से देश से निकाला; तर्क- इससे टैक्स पेयर्स पर बोझ पड़ेगा

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17 घंटे पहलेलेखक: मेलबर्न से अमित चौधरी

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पिता वरुण के साथ खेलता छह साल का कायान, सरकार के फैसले के खिलाफ परिवार कोर्ट गया है और मदद के लिए ऑनलाइन पिटिशन शुरू की है। - Dainik Bhaskar

पिता वरुण के साथ खेलता छह साल का कायान, सरकार के फैसले के खिलाफ परिवार कोर्ट गया है और मदद के लिए ऑनलाइन पिटिशन शुरू की है।

  • सांसद, सोशल वर्कर्स और सेलिब्रिटी ने 6 साल के बच्चे को डिपोर्ट करने का किया विरोध

6 साल के कायान की मुस्कुराहट देखकर किसी का भी दिल पिघल जाए। लेकिन ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कायान समेत उसके पूरे परिवार को देश छोड़ने का हुक्म दिया है। सिर्फ इसलिए क्योंकि कायान को सेरेब्रल पाल्सी नाम की बीमारी है। यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो बच्चों की शारीरिक गति, चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है। इस वजह से इमिग्रेशन विभाग ने फरवरी में उसके परिवार की आखिरी एप्लिकेशन को भी रिजेक्ट कर दिया और देश छोड़ने का फरमान सुना दिया।

कायान के पिता वरुण कात्याल 12 साल पहले ऑस्ट्रेलिया स्टूडेंट वीसा पर आए थे। 2012 में शादी हुई और 2015 में कायान का जन्म हुआ। लेकिन जन्म से ही कायान को सेरेब्रल पाल्सी बीमारी ने घेर लिया। जैसे-तैसे जिंदगी पटरी पर लौट रही थी कि ऑस्ट्रेलिया के इमीग्रेशन विभाग ने 2018 में परिवार को परमानेंट रेसीडेंट वीजा देने से मना कर दिया। विभाग की दलील थी कि अगर उन्हें परमानेंट रेसीडेंट वीसा दे दिया तो कायान का इलाज ऑस्ट्रेलिया के टैक्स पेयर्स पर बोझ बन जाएगा।

ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल सुविधा फ्री
दरअसल ऑस्ट्रेलिया में परमानेंट रेसीडेंट्स और नागरिकों के लिए मेडिकल सुविधा फ्री है, इसका खर्च सरकार टैक्स से आने वाली आय से निकालती है। मेलबर्न में शेफ की नौकरी कर रहे वरुण ने भास्कर को बताया कि उन्होंने इमीग्रेशन विभाग से बेटे की बीमारी का खर्च खुद उठाने की बात कही। इस पर विभाग ने अगले 10 साल में इलाज पर खर्च होने वाली राशि करीब 6 करोड़ रुपए की बचत दिखाने को कहा। लेकिन इतनी बड़ी राशि हमारे पास नहीं थी।

वे बताते हैं कि वह अब तक अपनी सारी जमा पूंजी कायान के इलाज में लगा चुके है। यही नहीं, बार बार रिजेक्ट होने वाली वीजा एप्लिकेशन में भी 20 लाख रुपए लगा चुके हैं। इस बीच वरुण और उनकी पत्नी ने एडमिनिस्ट्रेटिव अपील ट्रिब्यूनल में अपील दायर की है जबकि कायान की अपील फेडरल अदालत में लंबित है। बहरहाल वरुण ने मदद के लिए एक ऑनलाइन पीटिशन शुरू की है। कायान के समर्थन में कई सासंद, व सेलिब्रिटी आए है।

ह्यूमन राइट वॉच की निदेशक एलेन पियर्सन कहती हैं, ‘अगर कायान डिसेबिलिटी का शिकार नहीं होता तो आज ऑस्ट्रेलियाई नागरिक होता।’ लेबर सांसद पीटर ने कहा, ऑस्ट्रेलिया में जन्मे डिसेबल बच्चे को डिपोर्ट करना सरकार की अनैतिकता और कुप्रबंध को दर्शाता है।

2019 में ऐसे ही केस में इमिग्रेशन मिनिस्टर ने आइरिश परिवार को दी थी राहत

  • ऑस्ट्रेलिया के माइग्रेशन एक्ट के मुताबिक इमिग्रेशन मिनिस्टर के पास विशेष शक्तियां हैं जिनके आधार पर ऐसे मामलों में वीजा की परमिशन दे सकते हैं, लेकिन यह सब उनके विवेक पर निर्भर करता है।
  • गृह विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि नियम सबके लिए बराबर है। ये नियम ऑस्ट्रेलिया के नागरिकों, परमानेंट रेसिडेंट्स और स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं।
  • 2019 में 3 साल के आइरिश बच्चे के मामले में इमिग्रेशन मिनिस्टर ने विशेषाधिकार का उपयोग कर परिवार को रहने की इजाजत दी थी। 1 लाख लोगों ने पिटिशन साइन कर सरकार से दखल की मांग की थी।

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