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अब शुभ कार्य शुरू करने का सबसे उत्तम समय: सरकारी घोषणा में कुंभ शुरू, मगर ज्योतिषीय गणनाओं में 12 वर्ष बाद आज कुंभ राशि में बृहस्पति के प्रवेश से फलीभूत होगा कुंभ

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हरिद्वार20 घंटे पहलेलेखक: रितेश शुक्ल

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जूना अखाड़ा में नागा साधु बनने का अनुष्ठान। - Dainik Bhaskar

जूना अखाड़ा में नागा साधु बनने का अनुष्ठान।

सरकारी घोषणा में हरिद्वार में कुंभ की शुरुआत 1 अप्रैल से हो चुकी है…मगर ज्योतिषीय गणनाओं के हिसाब से कुंभ की शुरुआत मंगलवार 6 अप्रैल से होगी। कहने को तो कुंभ के लिए संतों का जमावड़ा मकर संक्रांति से ही शुरू हो जाता है और शिवरात्रि को पहला बड़ा स्नान भी माना जाता है। मगर ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक कुंभ की शुरुआत तब होती है जब बृहस्पति, कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। 12 साल में एक बार बनने वाला यह संयोग 6 अप्रैल को ही बनेगा। मान्यता है कि इसी दिन से कुंभ फलीभूत होगा।

बालाजीपुरम में रामानुजाचार्य संप्रदाय के जगदगुरु श्रीकांताचार्य महाराज बताते हैं कि कुंभ के शुरू होने के लिए जरूरी है कि गुरु ग्रह कुंभ राशि में और सूर्य मेष या सिंह राशि में प्रवेश करें। कुंभ के आरंभ होने की तिथि पर संत समाज के अलग-अलग प्रतिनिधियों का कहना है कि मकर संक्रांति से साधु-संत कुंभ के शुरू होने की प्रतीक्षा करते हैं।

इस प्रतीक्षा का बड़ा पड़ाव शिवरात्रि को माना जाता है। मगर कुंभ की शुरुआत तभी होती है जब ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनता है। बृहस्पति को कुंभ राशि से निकलकर दोबारा इस राशि में प्रवेश करने में 11 साल, 11 माह और 27 दिन लगते हैं। अत: कुंभ 12 साल बाद आता है।

क्या है कुंभ की खासियत

ज्योतिषीय गणनाओं में कुंभ राशि का स्वामी शनिदेव को माना जाता है। शनि को कर्म एवं लाभ का प्रतीक माना जाता है जबकि बृहस्पति को भाग्य और मोक्ष का। सनातन धर्म में व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्त तभी हो सकती है जब भाग्य, कर्म और लाभ में संतुलन हो। कुंभ का समय वह होता है जब बृहस्पति ग्रह, कुंभ राशि में प्रवेश करता है।

यानी राशि का स्वामी शनि और बृहस्पति दोनों का प्रभाव होता है। अत: मान्यता है कि कुंभ के दौरान मोक्ष प्राप्ति की संभावना सर्वाधिक होती है। इस समय बृहस्पति के प्रभाव के कारण व्यक्ति की पाप करने की क्षमता क्षीण होती है और वह सत्कर्म की ओर प्रेरित होता है। अत: इसे शुभकार्य शुरू करने का उत्तम समय माना गया है।

हरिद्वार, प्रयाग और उज्जैन में कुंभ का आयोजन ग्रह परिवर्तन से तय होता है

जब गुरु कुंभ राशि में आते हैं और सूर्य मेष राशि में प्रवेश करके उच्च के होते हैं तब पूर्ण कुंभ होता है। 13 अप्रैल को सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर रहे हैं। प्रयागः जब गुरु मकर राशि और सूर्य मेष राशि में होते हैं तब कुंभ होता है। उज्जैन के कुंभ के लिए सूर्य का मेष और नासिक के लिए सूर्य का सिंह राशि में होना जरूरी है। इन दोनों को सिंहस्थ कहते हैं।

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