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अंग्रेजी बोतल में देसी शराब…: देसी शराब को बोतल में भरकर ब्रांडेड शराब का लेबल लगाते, राजस्थान से शराबबंदी वाले बिहार में करते थे सप्लाई

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  • In Alwar’s Mundawar, When The Country Liquor Became English, The Police Also Got Shocked, The Same Liquor Was Reaching Many States.

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अलवर7 घंटे पहले

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देसी शराब को अंग्रेजी बोतलों में पैक कर बेचने वाला गिरोह। यह देसी शराब में विदेशी लेबल लगाकर फर्जीवाड़ा कर रहा था।

  • अलवर के मुंडावर में पुलिस ने पकड़ा फर्जीवाड़ा, 40 पेटी देसी शराब बरामद
  • शराब की कई ब्रांडेड कंपनियों के लेबल और पैकिंग मशीन भी जब्त की गई

अंग्रेजी बोतल में देसी शराब। अलवर जिले के मुंडावर में पुलिस ने एक ऐसे ही गिरोह का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह हरियाणा-राजस्थान से देसी शराब खरीदता। फिर लाल रंग वाली देशी शराब को अंग्रेजी शराब की बोतल में भरकर उस पर ब्रांडेड कंपनियों जैसे- इम्पीरियल ब्लू, ऑफिसर्स च्वाइस, बैगपाइपर और मैकडॉवल नंबर-1 का लेबल लगा देते थे। इसके बाद इन बड़े ब्रांड वाली शराब के नाम से देसी शराब को ही बिहार और आसपास के जिलों में सप्लाई कर देते थे। गिरोह के इस फर्जीवाड़े को देखकर पुलिस भी चौंक गई।

देसी शराब से अंगेजी शराब बनाने का सामान। पुलिस ने जब्त किया।

देसी शराब से अंगेजी शराब बनाने का सामान। पुलिस ने जब्त किया।

पुलिस ने बताया कि मुंडावर में चिरुणी नदी के पास एक मकान में यह अवैध धंधा चल रहा था। पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है। इनके नाम इंद्रजीत, विजय कुमार और प्रकाश है। मौके से 40 पेटी देसी शराब, बोतल पैकिंग करने वाली मशीन और ब्रांडेड कंपनियों के लेबल बरामद किए गए हैं।

यूं करते थे खेल
गिरफ्तार लोगों से शुरुआती पूछताछ के आधार पर पता चला कि यह गिरोह हरियाणा और राजस्थान से देसी शराब खरीदता। पिछले कुछ सालों से देसी शराब भी लाल रंग में आने लगी है। इसी देसी शराब को अंग्रेजी शराब की बोतल में भरकर लेबल लगाकर एकदम नई पैकिंग की तरह कर देते थे। फिर इस शराब को बाजार के भावों से कम कीमत में बेचकर खुद भी कई गुना पैसे कमाते थे। ये लोग एक दिन में करीब 15 पेटी शराब बना देते थे।

यानी ये 5 हजार रुपए कीमत वाली अंग्रेजी शराब को करीब 25 सौ रुपए में बेच देते थे। एक पेटी देसी शराब करीब 12 सौ रुपए में बाजार से खरीद कर लाते थे। इस तरह एक पेटी पर करीब 13 सौ रुपए कमाई करते थे। दिन में करीब 15 से 20 पेटी शराब तैयार कर देते थे।

बिहार में शराबबंदी है। ऐसे में यह गिरोह अपनी अधिकांश सप्लाई वहीं पर करता था। क्योंकि, वहां जांच या पकड़े जाने का खतरा कम होता था। पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश कर रही है।

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